विटामिन-A के फायदे – Benefits of Vitamin A in Hindi

दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, विटामिन की श्रंखला में आज हम आपको एक ऐसे विटामिन के बारे में बतायेंगे जिसे आंखों की “आवश्यक आवश्यकता” माना जाता है, हालांकि इसके कार्य और भी बहुत हैं। इसका सबसे बड़ा कार्य भ्रूण की रक्षा करना और सर्वांगणिय विकास करना है। विटामिन की सूचि में इसका नाम भी सबसे पहले आता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं “विटामिन-ए” की। विटामिन-ए, के हमारे शरीर के लिये बहुत फायदे होते हैं जिनका जिक्र हम आज के इस आर्टिकल में करेंगे और यही है हमारा आज का टॉपिक “विटामिन-A के फायदे”। 

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको विटामिन-ए के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इसके क्या फायदे होते हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि विटामिन-ए क्या है, इसके कार्य क्या हैं और इसके कितने रूप होते हैं?  फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

विटामिन-A के फायदे

विटामिन-A क्या है? – What is Vitamin-A?

दोस्तो, विटामिन-ए वसा में घुलनशील विटामिन है। इसका रसायनिक नाम रेटिनॉल है। इसकी खोज एल्मर वी। मैकुलम और मार्गुराइट डेविस के द्वारा सन् 1912 से 1914 के दौरान की गई। विटामिन-ए फैट सॉल्युबल (Fat-soluble) यानि वसा में घुलनशील कंपाउंड का जेनेटिक टर्म है जिसमें रेटिनॉल (Retinol), रेटिनल (Retinal) और रेटिनाइल एस्टर (Retinyl ester) कम्पाउंड सम्मलित होते हैं। हमारा शरीर विटामिन-ए का कभी भी सीधे उपयोग नहीं करता। विटामिन-ए की अधिकांश मात्रा लिवर में रेटिनल एस्टर के रूप में संग्रहित (store) हो जाती है। शरीर इन एस्टर को ऑल-ट्रांस-रेटिनॉल (All-trans-retinol) में तोड़ता है जो रेटिनॉल बाइंडिंग प्रोटीन (RBP) से जुड़ जाता है  तत्पश्चात् यह रक्त में जाकर अपना कार्य करता है। 

विटामिन-ए के कार्य – Functions of Vitamin-A

विटामिन-ए के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं – 

1. दृष्टि की रक्षा करे (Protect Vision)- यह विटामिन आंखों के लिये आवश्यक आवश्यकता है। यदि इसे आंखों वाला विटामिन कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि यह आंखों की दृष्टि बढ़ाने और अनेक नेत्र रोगों से आंखों की रक्षा करने का कार्य करता है।

2. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करें (Strengthen the Immune System)- विटामिन-ए, अत्यंत प्रभावशाली एंटीऑक्सीडेंट है। यह संक्रमण से लड़ने के लिये प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का काम करता है। 

3. एनीमिया रोग से बचाव करे। 

4. भ्रूण का संपूर्ण विकास करे यानि, दिल, फेफड़े, किडनी, हड्डी और आंखें आदि अंगों को बनाने में मदद करे। 

5. त्वचा को हाइड्रेट कर नमी बरकरार रखे और त्वचा को सूखने से बचाये तथा नाखूनों की रक्षा करे।

6. बालों को स्वस्थ रखे।

7. दांत, मसूड़े और हड्डियां को मजबूती दे। हड्डियों का विकास करे तथा अस्थि खनिज घनत्व को बनाये रखने में योगदान दे। 

8. नई कोशिकाओं के निर्माण और विकास कार्य में मदद करे। शरीर के हिस्सों में ट्यूमर के विकास को रोके। कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को दूर करे। 

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विटामिन-ए के रूप – Form of vitamin A 

भोजन में विटामिन-ए के दो रूप मिलते हैं – प्रीफॉर्मड् विटामिन-ए (Preformed Vitamin A) और प्रो-विटामिन-ए कैरोटेनॉयड्स (Provitamin A Carotenoids)। विवरण निम्न प्रकार है – 

1. प्रीफॉर्मड विटामिन-ए (Preformed Vitamin A) – विटामिन-ए के इस फॉर्म में रेटिनॉल और रेटिनल एस्टर होते हैं। इनका स्रोत मांस, मछली, लिवर, अंडे, दूध और डेयरी प्रोडक्ट होते हैं। 

2. प्रो-विटामिन-ए कैरोटेनॉयड्स (Provitamin A Carotenoids) – बीटा-कैरोटीन विटामिन-ए का दूसरा रूप है यह पौधों से प्राप्त होता है। इसका स्रोत फल, सब्जियां और नट्स होते हैं। 

विटामिन-ए की मात्रा – Vitamin A content 

आयु के अनुसार प्रतिदिन की विटामिन-ए की खुराक निम्न प्रकार है –

शिशु –

जन्म से 6 महीने की आयु :   लगभग 1333 .U (400 माइक्रोग्राम).

6 से 12 महीने की आयु : लगभग 1666.U (500 माइक्रोग्राम).

बच्चे –

1 वर्ष से 3 वर्ष की आयु : लगभग 1000.U (300 माइक्रोग्राम).

4 वर्ष से 8 वर्ष की आयु :  लगभग 1333 .U (400 माइक्रोग्राम).

9 वर्ष से 13 वर्ष की आयु : लगभग 2000 .U (600 माइक्रोग्राम).

पुरुष – 

14 वर्ष से अधिक आयु : लगभग 3000 IU (900 माइक्रोग्राम)।

महिला – 

14 वर्ष से अधिक आयु :  लगभग 2333.U (700 माइक्रोग्राम).

गर्भवती महिला :  लगभग 2500.U (750 माइक्रोग्राम).

स्तनपान कराने वाली महिला : लगभग 4000 .U (1200 माइक्रोग्राम).

(IU = 1 International Unit = 0.3 microgram Retinol Equivalent).

विटामिन-ए की कमी क्या है? – What is Vitamin-A Deficiency?

आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में लगभग प्रति डेसीलीटर 15 से 60 माइक्रोग्राम विटामिन-ए होता है।  जब यह मात्रा घट कर 15 माइक्रोग्राम से भी कम हो जाये तो यह मान विटामिन-ए की कमी को दर्शाता है। विटामिन-ए की कमी के लक्षणों का जिक्र हम आगे करेंगे। 

विटामिन-ए की कमी होने के कारण – Cause of Lack of Vitamin-A

विटामिन-ए की कमी के हो सकते हैं निम्नलिखित कारण –

1. कुपोषण- यह विटामिन-ए की कमी के होने का सबसे बड़ा और मुख्य कारण है। डेयरी प्रोडक्ट, मांस-मछली या अंडों का सेवन ना करने वालों में विटामिन-ए की कमी की सबसे अधिक संभावना रहती है।

2. शिशुओं को स्तनपान ना कराना – जो माताऐं अपने शिशुओं को स्तनपान नहीं करातीं या नहीं करवा पातीं, उन बच्चों में अक्सर विटामिन-ए की कमी अक्सर रहती है। माताओं के दूध में विटामिन-ए भरपूर मात्रा में होता है। 

3. अधिक मात्रा में मूत्र बनना तथा इसे विसर्जित करने से विटामिन-ए की कमी हो जाती है। यह स्थिति कुछ स्वास्थ समस्याओं के चलते बन जाती है जैसे कि यूटीआई इंफैक्शन, किडनी इंफैक्शन, कैंसर, निमोनिया टीबी आदि। 

4. कुछ अन्य स्वास्थ समस्याएं जिनका विस्तार से जिक्र हम आगे करेंगे जैसे कि सिस्टिक फाइब्रोसिस, सीलिएक रोग, जिआर्डियासिस, आंत में कृमि संक्रमण, पीलिया आदि। 

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विटामिन-ए की कमी के लक्षण – Symptoms of Vitamin-A Deficiency

विटामिन-ए की कमी के निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकते हैं –

1. त्वचा का शुष्क हो जाना जिसकी वजह से त्वचा का फट जाना।

2. त्वचा पर खुजली होना।

3. तलवों, हथेलियों, नाक और होंठ के आसपास की त्वचा पर पीले-नारंगी पैच का आ जाना।

4. होंठों का सूखना।

5. आंखों का लाल होना, आंखों में जलन होना, सूजन और सूखापन। 

6. इम्युनिटी का कमजोर हो जाना।

7. हड्डियों में कमजोरी। 

8. अधिक थकावट तथा कमजोरी महसूस करना। 

9. बार-बार संक्रमण से बीमार पड़ना।

10. रात को देखने में दिक्कत होना।

11. आत्मविश्वास की कमी।

12. छोटे बच्चों की हड्डियों और दांतों से संबंधित समस्याएं होना। 

विटामिन-ए की कमी से होने वाले रोग – Vitamin A Deficiency Diseases 

विटामिन-ए की कमी से हो सकते हैं निम्नलिखित रोग – 

1. नायक्टलोपिया (Nyctalopia) अर्थात् रतौंधी।

2. स्थाई अंधापन।

3. मीजल्स (Measles) यानि यह श्वसन तंत्र पर एक प्रकार का वायरस संक्रमण होता है। 

4.  सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis) – यानि फेफड़े से जुड़ी गंभीर समस्या।

5. सीलिएक रोग (Celiac Disease) – यानि आंतों से जुड़ी एक समस्या। 

6. जिआर्डियासिस (Giardiasis) – एक फ्लैगेलेट प्रोटोजोआ के साथ आंत का संक्रमण, जो दस्त और अन्य लक्षणों का कारण बनता है।

7. आंत में कृमि संक्रमण (Intestinal worm infection) – यानि आंतों के कीड़ों का संक्रमण।

8. अग्नाशय (Pancreas) में सूजन अथवा उसकी कार्य प्रणाली का सुचारु रूप से कार्य न करना। 

9. पीलिया (Jaundice)।

10. लिवर सिरोसिस (Cirrhosis of Liver)।

11. मूत्र पथ का संक्रमण (Urinary Tract Infection)।

12. एनीमिया (Anemia)।

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विटामिन-ए की अधिकता होने से वाले नुकसान – Disadvantages of Excess of Vitamin-A 

दोस्तो, विटामिन-ए की कमी से तो शरीर को नुकसान होता ही है परन्तु विटामिन-ए की मात्रा यदि शरीर में अधिक हो जाये तो हो सकते हैं निम्नलिखित नुकसान –

1. त्वचा पर सूरज की किरणों का असहनीय प्रभाव अर्थात् हल्की धूप से भी ऐसा लगने लगता है कि जैसे त्वचा जल जायेगी। 

2. पेट खराब होना, उल्टी, दस्त लगना।

3. सिर में दर्द रहना।

4. आंखों का लाल रहना।

5. नाखूनों में संक्रमण हो जाना।

6. मसूड़ों से सूजन आने से खून आना।

7. मुंह सूखना।

8. चिड़चिड़ापन रहना, आप ही आप झुंझलाहट आना, गुस्सा आना।

9. भूख कम लगना।

10. भ्रम की स्थिति बनना या असामान्य उत्तेजना। 

विटामिन-ए की कमी का परीक्षण – Vitamin A Deficiency Test 

दोस्तो, यहां हम स्पष्ट करते हैं कि रक्त में विटामिन-ए का लेवल तब तक कम नहीं हो सकता जब तक कि लिवर से इसकी आपूर्ति कम न हो जाए। शरीर में विटामिन-ए की कमी होना किसी बड़े रोग के होने की ओर इशारा कर सकती है। 

सामान्य तौर पर विटामिन-ए की कमी का निदान लक्षणों के आधार पर किया जाता है जैसे कि, रात को देखने में दिक्कत होना, आंखों में आंसू ना आना, आंखों का सूखापन, त्वचा में सूखापन, रक्त की कमी का संदेह आदि। इनके लिये निम्नलिखित टेस्ट किये जा सकते हैं –

1. आंखों का परीक्षण।

2. एनीमिया, विटामिन-ए स्तर तथा अन्य जानकारी के लिये ब्लड टेस्ट।

3. बच्चों के मामले में विटामिन-ए की कमी की जानकारी प्राप्त करने के लिए हाथ और पैर की हड्डियां का एक्स रे किया जा सकता है।  

विटामिन-ए की कमी की जांच रिपोर्ट – Vitamin-A Deficiency Test Report

सामान्यतः विटामिन-ए,  28 से 86 माइक्रोग्राम/डीएल (mcg/dL) होता है। यदि यह 28 mcr/dL की सीमा में है परन्तु विटामिन-ए की कमी बहुत ज्यादा ना हो तो जांच रिपोर्ट सामान्य मानी जा सकती है। हां, यदि यह 15 mcr/dL से भी कम रह जाये तो निश्चित रूप से यह विटामिन-ए की कमी मानी जाती है। 

विटामिन-ए की कमी का उपचार – Treatment of Vitamin a Deficiency 

विटामिन-ए की कमी के उपचार के लिये डॉक्टर निम्नलिखित विकल्प अपना सकते हैं –

1. यदि विटामिन-ए की कमी बहुत अधिक ना हो तो डॉक्टर प्राकृतिक रूप से इसकी कमी पूरी करने के लिये कहते हैं अर्थात् मरीज को विटामिन-ए युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसके लिये पीले और नारंगी फल, हरे पत्तेदार सब्जियां, गाजर, सूखी खुबानी, दुग्ध उत्पाद तथा मांस, मछली, अंडे खाने को कहा जाता है। 

2. यदि विटामिन-ए की अधिक कमी या गंभीर लक्षणों के मामले में मरीज को विटामिन-ए के सप्लीमेंट टेबलेट के रूप में खाने को कहा जाता है। 

3. अति गंभीर मामलों में विटामिन-ए के सप्लीमेंट इंजेक्शन के रूप में दिये जाते हैं तथा दूध, दुग्ध उत्पाद, मांस, मछली, अंडे लेने को कहा जाता है।

विटामिन-ए के स्रोत – Sources of Vitamin-A

विटामिन-ए के स्रोत निम्न प्रकार हैं – 

1. सूखी खुबानी  – 100 ग्राम सूखी खुबानी से लगभग 250.U (इंटरनेशनल यूनिट) विटामिन-ए मिल जाता है।

2. हरी पत्तेदार सब्जियां – 100 ग्राम हरी पत्तेदार सब्जियों से लगभग 196.U विटामिन-ए मिल जाता है।

3. गाजर – 100 ग्राम गाजर से लगभग 7051.U विटामिन-ए मिल जाता है।

4. फोर्टीफाइड ओटमील – 100 ग्राम फोर्टीफाइड ओटमील से लगभग 2574 .U विटामिन-ए मिल जाता है। 

5. आम – 100 ग्राम आम से लगभग 714 .U विटामिन-ए मिल जाता है। 

6. पपीता – 100 ग्राम पपीता से लगभग 1000.U विटामिन-ए मिल जाता है।

7. खरबूजा – 100 ग्राम खरबूजे से लगभग 772.U विटामिन-ए मिल जाता है।

8. शकरकंद – 100 ग्राम शक्करकंद से लगभग 14173.U विटामिन-ए मिल जाता है।

9. बीफ लिवर – 100 ग्राम बीफ लिवर से लगभग 26088 .U विटामिन-ए मिल जाता है।

10. सैलमन मछली – 100 ग्राम सैलमन मछली से लगभग 40 .U विटामिन-ए मिल जाता है।

11. दुग्ध उत्पाद – 100 मिली दूध से लगभग 208 .U विटामिन-ए मिल जाता है।

विटामिन-A के फायदे – Benefits of Vitamin A

दोस्तो, अब बताते हैं आपको विटामिन-ए के फायदे जो निम्न प्रकार हैं – 

1. आंखों की दृष्टि को बनाए रखें (Maintain Eyesight) – विटामिन-ए, सही मायने में आंखों का भोजन है जो दृष्टि को बरकरार रखता है, आंखों की दृष्टि को बढ़ाता है। वस्तुतः, विटामिन-ए आंख पर पड़ने वाले प्रकाश को मस्तिष्क में भेजने के लिए इलेक्ट्रिक सिग्नल में परिवर्तित करने में मदद करता है। आंखों की कोशिकाओं, जो देखने में सहायता करती हैं, को स्वस्थ रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाता है। यह आंखों के रोगों से, आंखों का बचाव भी करता है। विटामिन रोडोप्सिन वर्णक का एक प्रमुख घटक होने के नाते यदि इस विटामिन की कमी हो जाये तो रतौंधी जैसा रोग होने की अधिक संभावना रहती है। रतौंधी को नायक्टलोपिया (Nyctalopia) के नाम से भी जाना जाता है। 

2. मैकुलर डिजनरेशन के जोखिम को दूर करें(Eliminate the Risk of Macular Degeneration) – बढ़ती उम्र से संबंधित मैकुलर डिजेनेरेशन मैकुलर डिजेनेरेशन (Age related Macular Degeneration -AMD) नेत्र विकार है जिसमें उम्र बढ़ने के साथ-साथ दृष्टि कमजोर होती चली जाती है क्योंकि रेटिना क्षतिग्रस्त होने लगता है। रेटिना आंख का केन्द्रिय भाग होता है जो देखने की क्रिया में प्रमुख भूमिका निभाता है।

यदि विटामिन-ए पर्याप्त मात्रा में नियमित रूप से मिलता रहे तो मैकुलर डिजेनेरेशन के खतरे को टाला जा सकता है। एक रिसर्च बताती है कि बीटा-कैरोटीन (Beta-Carotene), अल्फा-कैरोटीन (Alpha-Carotene) और बीटा-क्रिप्टोक्सैन्थिन (Beta-cryptoxanthin) के उच्च रक्त स्तर, इस विकार के खतरे को 25 प्रतिशत तक कम कर सकने में सक्षम होते हैं। 

3. श्वसन तंत्र संक्रमण के खतरे को दूर करें (Eliminate the Risk of Respiratory Tract Infection)- विटामिन-ए की कमी से सूखी खांसी, नाक बहना और बुखार की शिकायत देखी जाती है जोकि एक सामान्य बात है परन्तु जब शरीर पर चकत्ते भी दिखने लग जायें तो यह सामान्य बात नहीं होती बल्कि गंभीर समस्या होती है। यह श्वसन तंत्र पर एक प्रकार का वायरस संक्रमण होता है जिसे मीजल्स (Measles) कहा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या से राहत पाने के लिये विटामिन-ए युक्त खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल किया जाना चाहिये। विटामिन-ए की पर्याप्त मात्रा से भविष्य में भी मीजल्स (Measles) संक्रमण के खतरे को दूर किया जा सकता है। 

4. कैंसर के खतरे को कम करें (Reduce the Risk of Cancer) – विटामिन-ए, कैंसर की कोशिकाओं के विरुद्ध लड़ने में सक्षम होता है इसलिये विटामिन-ए की पर्याप्त मात्रा कोशिकाओं का बचाव करता है तथा नई कोशिकाओं के निर्माण और विकास में योगदान देता है। यह शरीर के हिस्सों में ट्यूमर के विकास को रोकता है।

कैरोटेनॉयड्स (Carotenoids) की पर्याप्त मात्रा, फेफड़े (Lungs), प्रोस्टेट (Prostate), हॉजकिन का लिंफोमा (Hodgkin’s lymphoma), मूत्राशय के कैंसर (bladder cancer) आदि के खतरे की संभावना को दूर करता है। 

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5. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये (Increase Immunity)- विटामिन-ए की पर्याप्त मात्रा, संक्रमण से होने वाली बीमारियों से बचाव करने वाली प्रतिक्रियाओं को उत्तेजित (Stimulate) करके प्रतिरक्षा स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। विटामिन-ए, बी-और टी-कोशिकाओं के निर्माण में योगदान करता है। ये कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में अपनी सक्रिय भूमिका निभाकर बीमारी से बचाती हैं। अतः अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिये विटामिन-ए युक्त खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिये।

6. प्रजनन क्षमता और भ्रूण के विकास में सहायक (Aids in Fertility and Fetal Development)- दोस्तो, प्रजनन क्षमता में विटामिन-ए, स्त्री और पुरुष दोनों में अपनी बराबर की भूमिका निभाता है। यह पुरुष में वीर्य बनाने की प्रक्रिया और शुक्राणुओं के विकास में मदद करता है तो स्त्री में अंडा बनने, उसके विकास और गर्भधारण में सहायता करता है। गर्भधारण के बाद भ्रूण के ऊतकों के विकास तथा भ्रूण के विकास में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

7. हड्डियों के स्वास्थ्य के लिये लाभकारी (Beneficial for Bone Health)- हड्डियों के स्वास्थ के लिये हड्डी का घनत्व अर्थात् अस्थि खनिज घनत्व (Bone Mineral Density) सही रहना चाहिये, तभी हड्डियों में मजबूती आती है। इसके लिये कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, आयरन और ज़िंक जैसे खनिज और विटामिन-डी की आवश्यकता होती है। विटामिन-डी के साथ-साथ विटामिन-ए का होना भी बेहद जरूरी होता है।

एक शोध बताती है कि विटामिन-ए, प्रोविटामिन-ए कैरोटीनॉयड (विटामिन-ए का एक्टिवेटिड रूप), अप्रत्यक्ष रूप में हड्डियों के विकास में मदद करता है। विटामिन-ए की कमी होने से हड्डियों में फ्रैक्चर होने का जोखिम बना रहता है। शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन-ए के होने से हड्डियों में फ्रैक्चर की संभावना 6 प्रतिशत तक कम हो जाती है। यहां हम एक बात स्पष्ट कर दें कि शरीर में विटामिन-ए की अधिकता भी हड्डियों के स्वास्थ के लिए नुकसानदायक हो सकता है। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको विटामिन-A के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विटामिन-ए क्या है, विटामिन-ए के कार्य, विटामिन-ए के रूप, विटामिन-ए की मात्रा, विटामिन-ए की कमी क्या है, विटामिन-ए की कमी होने के कारण, विटामिन-ए की कमी के लक्षण, विटामिन-ए की कमी से होने वाले रोग, विटामिन-ए की अधिकता होने से वाले नुकसान, विटामिन-ए की कमी का परीक्षण, विटामिन-ए की कमी की जांच रिपोर्ट, विटामिन-ए की कमी का उपचार और विटामिन-ए के स्रोत, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से विटामिन-ए के फायदे भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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विटामिन-ए के फायदे

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दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको विटामिन-A के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विटामिन-ए क्या है, विटामिन-ए के कार्य, विटामिन-ए के रूप, विटामिन-ए की मात्रा, विटामिन-ए की कमी क्या है, विटामिन-ए की कमी होने के कारण, विटामिन-ए की कमी के लक्षण, विटामिन-ए की कमी से होने वाले रोग, विटामिन-ए की अधिकता होने से वाले नुकसान, विटामिन-ए की कमी का परीक्षण, विटामिन-ए की कमी की जांच रिपोर्ट, विटामिन-ए की कमी का उपचार और विटामिन-ए के स्रोत, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।

Author

Shiv Kumar Kardam

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Desi Health Club

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